मां का वात्सल्य है जनाब,
जो मिलता है बड़े नसीबों से,
मां का वात्सल्य किसी अमृत से कम नहीं साहब,
मां की डाट में भी वात्सल्य,
मां के गुस्से में भी वात्सल्य,
मां का प्यार से वो खाना खिलाना ,
मां की वो गूंज और पुकार,
मां के वात्सल्य की सोंधी सोंधी
सुगंध हर तरफ है साहब,
मां का वात्सल्य ही हमारी जिंदगी की असल पहचान है।
- आकांक्षा गुप्ता
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