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लौट आओ

                
                                                         
                            धूप, धूल, धुआँ
                                                                 
                            
और
धूम - धड़ाके के सिवा
कुछ भी नहीं मिलेगा
तुम्हें वहाँ..
लौट आओ.
कृष्ण की बाँसूरी,
हलधर का हल,
कबीर का चरखा
मिलेगा तुम्हें यहाँ
लौट आओ.
लहलहाती क्यारियाँ,
पीपल की छाँव,
शीतल पनघट
वहाँ कहाँ..
लौट आओ
पिता की जर्जर भुजाएं,
माँ की स्निग्ध आँखें
तुम्हें समेट लेने
को हैं आतुर
लौट आओ.
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2 महीने पहले

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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