तुम्हारा
कुछ भी
मेरा बहुत कुछ है
प्रिय
तुम्हारा होना ही
काफी है
मेरे लिए
तुम्हारा मौन
मेरे लिए
संभाषण से कम नहीं
तुम्हारी मुस्कान
मेरे लिए
खुशियों का अंबार
तुम्हारा कुछ भी
मेरा बहुत कुछ है
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