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किसी को पता ही नहीं

                
                                                         
                            होना क्या है, किसी को पता ही नहीं,
                                                                 
                            
तो फिर रोएँ क्यों, किसी को पता ही नहीं।

कौन साथ है, किसी को पता ही नहीं,
कौन साथ छोड़ जाएगा, किसी को पता ही नहीं।

हम कौन हैं, यह भी पता नहीं,
हमारा कौन होगा, यह भी पता नहीं।

कौन दिल में बस जाएगा, पता ही नहीं,
कौन पल भर में दिल तोड़ जाएगा, पता ही नहीं।

आज जो अपने लगते हैं,
कल वही बेगाने हो सकते हैं।

वक़्त कब किसे बदल दे,
किसी को पता ही नहीं।

मुस्कुरा लो, क्या पता यह मुस्कान आख़िरी हो,
जी भर के जी लो, क्या पता यह शाम आख़िरी हो।

कौन-सी मुलाक़ात आख़िरी हो जाए,
कौन-सी बात आख़िरी रह जाए,
कौन-सी याद आख़िरी बन जाए,
किसी को पता ही नहीं।

ज़िंदगी पल-पल रंग बदलती है,
साँसों का कोई भरोसा नहीं।

आज जो अपना है, उसे अपना ही रहने दो,
कल क्या हो जाए, किसी को पता ही नहीं।
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2 महीने पहले

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