जिस ख्वाब को कभी आँखों में सजाया था,
आज उसी ख्वाब को हकीकत की ज़मीं पर उतरते देखा।
कुछ पल के लिए लगा, जैसे सपनों ने खुद मुझसे आकर कहा हो—
“देखो, तुम्हारा इंतज़ार बेकार नहीं गया…”
-संजय श्रीवास्तव
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