सुबह से लेकर शाम तक करते रहे उसके सारे काम और बात न की कोई फिजूल की।
तन्हा थे बेकार नहीं शाम होते ही हमे भी रहता है कुछ काम, बता तो उसको कल सुबह होंगे उसके बाकी के काम।
कुछ तो ख्वाब ख्वाइशै हमारी भी हैं जो ईश्वर ने कबूल की।
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