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कैद खुशबू

                
                                                         
                            "कैद खुशबू"
                                                                 
                            

मुट्ठियों में कोई खुशबू कैद है,
दिल में धड़कन की तरह तू कैद है।
तेरी यादों की महक हर साँस में,
रूह के हर कोने में बस तू कैद है।

जिस नज़र ने बाँध ली मेरी नज़र,
उस नज़र में प्रेम का जादू कैद है।
देखते ही भूल बैठा मैं जहाँ,
उस एक पल में पूरा आलम कैद है।

बात तेरी जब भी होठों पर सजी,
मौन में भी एक तरन्नुम कैद है।
दूर रहकर भी लगे तू पास है,
हर दिशा में तेरा ही पहलू कैद है।

चाँदनी भी तेरे आगे फीकी लगे,
तेरे चेहरे में उजालों का सवेरा कैद है।
फूल, मौसम, तितलियाँ सब कह उठें,
तेरी मुस्कान में हर रंग कैद है।

चाहतों का सिलसिला यूँ ही रहे,
वक़्त की हर चाल से ऊपर कैद है।
इश्क़ यदि सच्चा हो, तो जान लो—
एक-दूजे में ही पूरा खुदा कैद है।
-अतिशा माथुर
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

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