अरे चाँद!
लगता है आज,
तुम ज्यादा ही शर्माओगे!
तुम्हे मालूम है,
मेरे आँगन में भी है,
एक सुन्दर सा चाँद।
कि मेरा मनोहर चाँद,
आज रात छत पर उतरेगा।
क्या मेरे चाँद के सामने,
निकल नहीं पाओगे!
हाँ, मेरे चाँद को देखकर,
घने बादलों में छुप जाओगे!!
छुपने का तो बहाना मात्र है,
शायद तुम्हें थोड़ी ईर्ष्या भी है।
कि मेरे घर आँगन में,
नित विहरता है,
एक सुन्दर चाँद।
मेरा चाँद।
अरे 'बेरंग' चाँद।
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