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राहिब सुल्तानलुरी

                
                                                         
                            मैं सज कर आऊँगी जब करवा चौथ में,
                                                                 
                            
तुम चाँद बनकर आना मेरी ज़िंदगी में।
हाथों में मेहंदी, माथे पर बिंदिया,
नाम तुम्हारा होगा मेरी हर खुशियों में।
लाल जोड़े में जब मैं सामने आऊँगी,
प्यार की खुशबू बिखराऊँगी तेरी दुनिया में।
चाँद को देखकर जब तेरा चेहरा निहारूँगी,
सजदे में तुझे माँगूँगी अपनी हर दुआ में।
प्यास भी होगी, इंतज़ार भी होगा,
दिल में सिर्फ़ तेरा ही दीदार होगा।
जब छलनी से देखूँगी चाँद के बहाने,
आँखों में होंगे प्यार के लाखों तराने।
तुम मेरे माथे की बिंदिया बन जाना,
मेरे जीवन की सबसे प्यारी खुशियाँ बन जाना।
हर जन्म में बस तेरा ही साथ चाहूँगी,
मैं सज कर आऊँगी जब करवा चौथ में,
तुम्हें देखकर फिर से तुझ पर मर जाऊँगी।
-राहिब सुल्तानपुरी
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3 घंटे पहले

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