इस जहां को तु रण समझ ले ।
या तो इसे मरण समझ ले ।
धैर्य को तो धारण कर ले ।
देह में तु सांस रख ले ।
अपने हृदय में आस रख ले।
विजय की उम्मीद रख ले ।
जीत की तू जिद रख ले ।
होगी विजय तेरी खुद पर इतना विश्वास रख ले
तो तू घने अवसाद में अपनी सफलता खोज लेगा ।
घने तिमिर में भी सूरज निकलता ढूंढ लेगा ।
झंझावात में भी तू अपनी सफलता ढूंढ लेगा ।
-सोनाक्षी मौर्या
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