" हिंदी दिवस की बात कहें हम "
आओ खुलकर बात कहें हम
अपने सुंदर जज़्बात कहें हम
निसर्ग से लेकर शब्दों के धन
चलो हिंदी की सौगात कहें हम
वाद की बातें समझ सकें पर
विवाद भाषा का हैं बेमानी
संवाद को दृढ़ करने खातिर
मिलकर मन की बात कहें हम
इन्सान बनाता आया सरहद
भावों को ना काबू कर सका
भाषा ने उसको दिया है जीवन
उस संवेदन की बात कहें हम
अधर खुलें तो निकले केवल
वर्णों की माला का सरगम
झंकृत होती हैं देवनागरी
हिंदी दिवस की बात कहें हम
-विजय दयाराम मेश्राम
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