हरा हरा सावन, हरी हरियाली ,
आयी हैं इक रुत, फूलों वाली.....।
झूले पड़ गये, अमुआ की डाली,
हरा हरा सावन, हरी हरियाली.....।
ये पर्वतों के मंज़र, चूमे गगन को,
ये मस्त नज़ारे, चुरा लेते मन क़ो...।
काली घटा, छायी मतवाली.....,
हरा हरा सावन, हरी हरियाली.....।
कहीं कोई झरना, ग़ज़ल गा रहा है,
कहीं कोई बुलबुल, तराना सुनाये...।
पुरवा ने छेड़ी कोई, तान मतवाली.....,
हरा हरा सावन, हरी हरियाली....।
कलियों पे भंवरे, गुंज़ार कर रहें हैं....,
जैसे तुम हम सनम, प्यार कर रहें हैं...।
खुशियों की डोली, बहारों वाली......,
हरा हरा सावन, हरी हरियाली......।
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