आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

ब्रज की मिठास हो या अवध का शासन हो

                
                                                         
                            हिंदुस्तान के शीश पर सम्मान की बिंदी,
                                                                 
                            
हर भारतीय के हृदय का आह्वान है हिंदी।
मन के हर भाव की भाषा है हिंदी,
मन के हर भाव का सुंदर गान है हिंदी।।

रहीम की हिंदी, कबीर की हिंदी,
भारतेंदु, द्विवेदी से भाषावीर की हिंदी।
तुलसी की हिंदी मीरा की हिंदी,
सूर जैसे प्रेम में अधीर की हिंदी।
भक्ति में प्रेम का उत्थान है हिंदी।।
मन के हर भाव का सुंदर गान है हिंदी।।

ब्रज की मिठास हो या अवध का शासन हो,
खड़ी बोली की सीधाई, पाली का अनुशासन हो।
बच्चों की बोली हो या बूढ़ो का भाषण हो,
हर एक के मुख में हिंदी का प्राशन हो।
हर हृदय के भाव का प्रमाण है हिंदी।।
मन के हर भाव का सुंदर गान है हिंदी।।2।।

मैथिली का देश प्रेम दिनकर का राग है हिंदी,
निराला की करुणा है नीरज की आग है हिंदी।
महादेवी की रचना, सुभद्रा का अनुराग है हिंदी,
बच्चन की मधुशाला, दुष्यंत का प्रज्ञा है हिंदी।
यशोधरा का तप है, बुद्ध का प्रयाण है हिंदी।।
मन के हर भाव का सुंदर गान है हिंदी।।3।।

प्रेमचंद की कथा है यह, जयशंकर की हिंदी।
अज्ञेय की साधना है सांकृत्यायन की हिंदी।
प्रदीप का गीत है यह, हरिऔध की हिन्दी,
भगवती का अखड़पन, सर्वेश्वर दयाल की हिंदी।
मीत के अज्ञान अंधेरे में ज्ञान का विहान है हिंदी।।
मन के हर भाव का सुंदर गान है हिंदी।।4। ।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
9 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर