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"है कोई अदृश्य सत्य..

                
                                                         
                            अभी तुम मिली नहीं हो,
                                                                 
                            
फिर भी जाने क्यों
जब किसी और दिशा में बढ़ता हूँ
तो कोई अदृश्य हाथ मेरा रास्ता रोक लेती है।
किसी के आँखों में ठहरने लगता हु कभी
तो भीतर से आवाज आती है_
"अभी नहीं...."
न नाम तुम्हारा जनता हूं,
न चेहरा न कोई पता
फिर भी मेरी प्रतीक्षा में
जाने क्यों
तुम्हारा कोई अधिकार है।
शायद प्रेम मिलने से पहले ही अपना
रास्ता चुन लेती है ।
मुझे बिस्वास है_
एक दिन तुम मिलेगी,
और उस दी समझूंगा,
जिसे मैं अपनी बेचैनी समझता रहा,
वह तुम्हारी ओर से आती एक पुकार थी।
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2 सप्ताह पहले

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