गुरु (कविता)
गुरु असीम प्रकाश पुंज ज्योति,
गुरु ही ज्ञान अनंत पुनीत भक्ति ।
गुरु ही मेरा मान और अभिमान ,
गुरु में जीवन प्राण और सम्मान ।
गुरु दीर्घ श्वास और विश्वास ,
गुरु मेरे लक्ष्य का पूर्ण प्रयास।
गुरु मेरा मान और मेरी पहचान,
गुरु मेरा धैर्य और गुणों की खान।
गुरु का अलौकिक सत्य स्वरूप ,
गुरु ही नानक देव दिव्य अनूप ।
गुरु मेरे जीवन के मार्गदर्शक ,
सत्य असत्य बीच पथ-प्रदर्शक।
गुरु ही ब्रह्मा है गुरु ही विष्णु ,
गुरु ही महेश है गुरु मेरे भगवन।
गुरु चरणों में मेरा शत-शत वंदन ,
गुरु कृपा से जीवन का अभिनंदन।
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