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गुम होते अपने नाम

                
                                                         
                            गुम होते अपने नाम, बिछड़ते हुए अपने लोग…
                                                                 
                            
गुम होते जा रहे हैं कहीं, अब अपने ही नाम से,
बिछड़ते जा रहे हैं राहों में, अपने ही लोग तमाम।
कभी जिनके लिए हम अपनी पहचान हुआ करते थे,
आज उन्हीं की यादों में गुमनाम हुआ करते हैं।
वक़्त ने कुछ यूँ करवट बदली, रिश्तों के मायने बदल गए,
कुछ लोग हमसे दूर हुए, कुछ हम ख़ुद से बिछड़ गए।
अब न वो महफ़िलें अपनी हैं, न वो पहचान पुरानी,
बस दिल में शेष रह गई है, कुछ यादें और एक कहानी...!!!
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

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