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अनिकेत - गुजरे दिन

                
                                                         
                            गुजरे दिन
                                                                 
                            

तुम गुजरे जाते हो
कुछ बोल तो देते
वो दौर कैसा था
ये बोल तो देते

हाय ! गुज़रते हुए
तुमको शर्म नहीं आई
कितने जिंदा थे कितनों ने
गोली थी खाई
कैसे गुजरी थीं
वो बेरहम रातें
कितनी चुभती थीं
वो ज़ालिम की बातें
वो कितने दुःख में डूबे थे
ये बोल तो देते
वो दौर कैसा था
ये बोल तो देते

हम तो आजाद पंछी हैं
हम तब का क्या जानें
वो कैसे फांसी झूला था
हम दर्द क्या जानें
उनके अपने उनके सपने
सब यहीं छूटे
आजादी की खातिर
सब के प्राण यहीं छूटे
वो आखिर में क्या बोले थे
ये बोल तो देते
वो दौर कैसा था
ये बोल तो देते

आजादी को सांसे देकर
दीवाने लाये
खून में आजाद जैसे
जब दीवाने थे नहाये
हाय ! मेरे अपनों पर
क्या क्या न गुजरी
खेत खलिहान मेरे थे
पर चलती थी उसकी
वो कैसे सिसक कर रोये थे
ये बोल तो देते
वो दौर कैसा था
ये बोल तो देते

हम, हमारे बच्चों का
खाना पानी छीना
कितना दुखदाई था
उस वक्त का जीना
सोने की चिड़िया के लोग
एक आने को तरसे
खेती बाड़ी मेरी पर
एक दाने को तरसे
वो भूखे कैसे सोये थे
ये बोल तो देते
वो दौर कैसा था
ये बोल तो देते
तुम गुजरे जाते हो
कुछ बोल तो देते
वो दौर कैसा था
ये बोल तो देते
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2 महीने पहले

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