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गीत कोई

                
                                                         
                            गीत कोई गाऊँगा,
                                                                 
                            
मीत कोई मनाऊँगा,
ज़िंदगी से रूठकर
मैं न कभी जाऊँगा।
दर्द चाहे जितना मिले,
हँस के उसे निभाऊँगा,
टूटकर भी राह में
फिर नया दीप जलाऊँगा।
जो मिला, उसका शुक्र है,
जो नहीं मिला—भूल जाऊँगा,
कल की चिंता छोड़कर
आज को ही सजाऊँगा।
हार कितनी भी मिले,
हौसला न हारूँगा,
ज़िंदगी की धूप में
छाँव बनकर आऊँगा।
गीत कोई गाऊँगा,
मीत कोई मनाऊँगा,
ज़िंदगी से रूठकर
मैं न कभी जाऊँगा।
-श्रवण कुमार
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एक महीने पहले

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