मत मारो माँ मुझे कोख में, मैं भी बड़ी हो जाऊँगी,
छोटी सी चिंगारी से ज्वाला मैं बन जाऊँगी।
चलते-चलते जो राहों में, मैं गिरकर रोने लग जाऊँगी,
मत उठाना तुम मुझे माँ, मैं रोते-रोते चुप हो जाऊँगी।
मत दिलाना नए खिलौने और कपड़े,माँ दिला देना शिक्षा के नए सपने,
ब्याह में मत बेचना वो भूमि का खंड, दिला देना माँ मुझे शिक्षा का अवसर।
शिक्षा से मुझे ज्ञान मिलेगा, मान मिलेगा, सम्मान मिलेगा,मेरी गरिमापूर्ण जीवन का, यही तो असली आधार बनेगा।
एक न एक दिन मैं भी माँ बनूँगी, बस इतना फर्क तुझमें और मुझमें होगा,
तूने बेटे की चाह में भ्रूण जाँच कराई,
मैं हर बेटी की सुरक्षा की आवाज़ बनूँगी।
-ज्योति मणि
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