बहुत प्यार भरा है,
एक पिता के मन में।
भर देना चाहता सारी खुशियाँ,
बच्चों के जीवन में।
पिता है जब तक,
बच्चों को क्या डर है
छोटा सा बालक भी,
पिता के साथ निडर है।
पिता चाहे कितने भी,
तीर सहेंगे तन में।
फिर भी चाहत होगी,
बच्चों के प्रति मन में।
इच्छाएँ चाहे कितनी हों,
बच्चों की दूर गगन में।
पूरा करने की कोशिश रहती,
हर पिता के मन में।
क्या थोड़ा सा भी मर्म,
नहीं उनके प्रति अपने मन में?
क्या हिम्मत नहीं है वो हममें,
जो थी बालक श्रवण में?
बहुत प्यार भरा है,
एक पिता के मन में।
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