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एक माटी का दिया हूँ मैं,

                
                                                         
                            एक माटी का दिया हूँ मैं,
                                                                 
                            
भले ही माटी से बना हूं
अपने देश की पहचान हूँ मैं !
अंधकार में रोशनदान का प्रतीक चिन्ह हूँ मैं,
आ जाएं कितनी बाधाएं मेरे सामने,
डट कर सामना करता हूं मैं,
न डरता हूं न झुकता हूं मैं
भले ही छोटा सा हूँ मैं,
पर अपनी देश की माटी से बना हूं मैं,
न मुझे टूटने का डर है,
न मुझे अपना अस्तित्व खोने का डर है,
मै देश की माटी का प्रतीक हूं
इससे ही पनपा हूं इसी में मिल जाऊंगा,
जितना हो सकेगा मुझ से अपना कर्तव्य निभाऊंगा मैं।
जितनी रोशनी है मुझ में अंत तक उतना उजाला फैलाऊंगा मैं!
- आकांक्षा गुप्ता
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3 महीने पहले

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