देवता है यह हमारा और यही ईमान है,
प्राण से भी हमको प्यारा अपना हिंदुस्तान है।
माथे पर मिट्टी लगाते हम सदा चंदन समझ,
हर नदी गंगा है इसकी, हर शिखर भगवान है।
वेद, गीता, ज्ञान की यह देश है पावन धरा,
इस पुरातन देश की समृद्धि की पहचान है।
राम के और कृष्ण के यह शौर्य की साक्षी बनी,
इस धरा पर ही हुआ तो शक्ति का संधान है।
जिसकी रक्षक हैं हवाएँ, जिसकी रक्षक वादियाँ,
हर सिपाही इस जमीं की शान है और आन है।
हँस के क़ुर्बाँ हो गए थे मुल्क की सरहद पे जो,
उन शहीदों के लहू से देश का सम्मान है।
मत समझ लेना महज़ कपड़े का टुकड़ा तुम इसे,
यह तिरंगा अस्मिता है और अपनी शान है।
जिसकी ख़ातिर हँस के सह लें हर मुसीबत, हर अलम,
हर ख़ुशी, सारी इबादत देश पर कुरबान है।
अपना भारत ही बने संसार का सिरमौर अब,
‘अब्र’ दिल में पल रहा बस यही अरमान है।
-अब्र लखनवी
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