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"बस बता ना सके..."

                
                                                         
                            "बस बता ना सके..."
                                                                 
                            
एक चाहत थी उसे पाने की,
पर पा न सके।
उससे बेइंतहा मोहब्बत करते थे,
मगर कभी बता न सके।
बातें तो बस ख़्वाबों में ही हो सकीं,
हक़ीक़त में कुछ कह न सके।
जब उसे किसी और का होते देखा,
तो हम बस तड़पते रह गए।
कहते हैं मोहब्बत बहुत ख़ूबसूरत होती है,
मगर अपनी मोहब्बत का अंजाम हम देख न सके।
— शुभ तिवारी
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2 महीने पहले

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