आज चाँद को देखा
ढलती सांझ में देखा,
आकाश में अकेला
अग्रणी,
मानो सबको पीछे छोड़ आया
चाँद के दाग को गौर से देखा
तो ये अहसास हुआ कि दाग भी जरूरी है
वरना नज़र लग जाती है।
कुछ ऐसा ही दाग
मुझ जैसे शख्स के भीतर छिपा है
खूबियों के साथ ये सांवला रंग भी दिख जाता है।
कैसे बताएं 'रैना',
रूप-रंग से कुछनहीं हो पाता है,
आखिर अंत में ज्ञान ही काम आता है।।
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