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बिल्व पत्र

                
                                                         
                            बिल्व पत्र
                                                                 
                            
त्रिपुंड धारी का तृतीय नेत्र जीवन धारा जहां बहती है,
सत रज तम के जाल में बंधी ज़िन्दगी सुख-दुख सहती है।
बिल्वपत्र भी वही दोष जीवन के सारे मिटाता है,
बिल्वपत्र को शिवलिंग पर दोष दमन हित चढ़ाया जाता है।।१।।

मन बुद्धि अंहकार का शमन सहर्ष जहां हो जाता है,
जीवन के तसम का अंत शिव भक्ति से ही हो पाता है।
मन कर्म वचन जहां शुद्ध रहें देवत्व शरीर मिल जाता है,
इसीलिए बिल्व पत्र त्रिदोष शामक औषधि कहलाता है।।२।।

समस्त औषधियों में सर्वश्रेष्ठ जीवन सार समझाता है,
स्थूल सूक्ष्म अतिसूक्ष्म तरंगों का यह अधिष्ठाता कहलाता है।
सत्य सनातन और धर्म का यह प्रतीत बन जाता है,
इसीलिए त्रिषूल भी तीन विचारों को प्रसारित कर जाता है।।३।।

सृजन पालन संहार नियम सृष्टि के यहां माने जाते हैं,
तीन प्रकार के दोष भी आयुर्वेद में पहचाने जाते हैं।
जो इन तीनों दोषों का सहर्ष शमन करे वह बिंदु,
हम सबको भव सिंधु से पार सहर्ष ले जाता है।।४।।

बिल्वपत्र की महिमा अपार शिव प्रिय वृक्ष यह कहलाता है,
इसके नीचे त्रिदेव का सामीप्य अक्सर माना जाता है।
इसके तीनों पत्तों का रहस्य अति गूढ़ गोपनीय कहलाता है।
तभी बिल्व वृक्ष सभी वृक्षों में सबसे पवित्र कहलाता है।।५।।
 
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2 महीने पहले

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