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बेपरवाह बचपन

                
                                                         
                            वो भी एक दौर था, सपनों की दुनिया में जिया करते
                                                                 
                            
जब चाहा रूठ गए जब चाहा मान गए, परवाह न कल की करते
हुआ सपना पूरा, पड़ा है हर काम अधूरा, न जीते तो और क्या करते।
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2 घंटे पहले

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