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बेमतलब की बाते सोचता हूं मैं

                
                                                         
                            ये क्या बेमतलब की बाते सोचता हूं मैं,
                                                                 
                            
तू मेरा नहीं फ़िर क्यों तेरे बारे मैं सोचता हूं मैं।

तुझको देखना तक मेरे बस में नहीं,
और तेरे साथ रहने के ख्वाब देखता हूं मैं।

वो मंजर जो कभी मेरे होने का था ही नहीं,
उसी मंजर को मुसलसल देखता हूं मैं।

हद तो ये है कि मेरी तन्हाई भी गवाह हैं,
कि खुद को छोड़कर सिर्फ तुझे ढूंढता हूं मैं।

ये बेमतलब की बातें नहीं मेरा ही पागलपन है,
तू मेरा नहीं फ़िर भी तुझसे ही मोहब्बत करता हु मैं।
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8 घंटे पहले

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