बारिश की बूँदें जब धरती पर आती हैं,
किसी के होंठों पर मुस्कान ले आती हैं।
किसी किसान के सूने सपनों को रंग दे जाती हैं,
तो किसी की राहों में मुश्किल बन जाती हैं।
किसी के बागों में हरियाली ले आती हैं,
तो किसी के घर की फर्श भिगो जाती हैं।
कहीं खुशियों की बौछार बन बरसती हैं,
तो कहीं टूटते आशियानों का डर बन जाती हैं।
कुछ ऐसा ही इंसानों का भी फसाना है,
हर चेहरे के पीछे एक अलग जमाना है।
किसी के लिए हम उम्मीद की किरण बन जाते हैं,
तो अनजाने में किसी के दर्द का कारण बन जाते हैं।
न बूँद बुरी होती है, न इंसान बुरा होता है,
बस वक्त और हालात का असर होता है।
-नीता श्रीवास्तव
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