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बचपन के चंदा मामा

                
                                                         
                            बचपन के वो चंदा मामा,
                                                                 
                            
आ के मुझको लाड जताते।
चाँदी की छोटी प्याली में,
खुद खाते और हमें खिलाते।

मीठी-मीठी लोरी गाते,
थपकी देकर हमें सुलाते।
आँखों से आँसू छूती ही,
आकर मुझको प्यार जताते।

बचपन के वो चंदा मामा,
हाथ पकड़कर मुझे चलाते।
देखते मुझको सारी रात,
सुबह होते ही घर को जाते।

खिड़की से वो मुझे बुलाते,
आसमान की सैर कराते।
बादल के पीछे छुप-छुपकर,
मुझे हँसी की ठाठ लगवाते।

न जाने अब कहाँ छुपे हैं,
लगता मुझसे रूठ गए हैं।
अब ना मुझको लाड जताते,
ना प्ली में मुझे खिलाते।

आओ चंदा मामा आओ,
बचपन की बातें बतलाओ।
यादों के उन प्यारे पल में,
मुझको फिर से लेकर जाओ।
 
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एक घंटा पहले

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