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जग में उजियारा करते हम

                
                                                         
                            जीवन की पगडंडी पर
                                                                 
                            
यूं ही चलते रहते हम
धूप मिले या छांव मिले
बस आगे बढ़ते रहते हम

कभी शिकायत इससे करते
कभी शिकायत खुद से करते
कभी बैठ किस्मत को कोसे
यही भूल तो करते हम

जब से दर्पण हाथ में आया
खुद में सबको देखें हम
भीतर के एक दीपक से
जग में उजियारा करते हम

दुनिया की माया में फंस कर
सबको मायावी कहते हम
अंदर खिलने वाले फूलों को
अब तो असली कहते हम
-अनुपमा शर्मा
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1 सप्ताह पहले

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