सब अपनी-अपनी दिशा में अब बढ़ते जा रहे हैं,
कोई धूप-सा तेज़, कोई छाँव-सा धीरे चल रहा है।
किसी के पाँव में मंज़िल की जल्दी है,
किसी ने सफ़र को ही अपना घर मान लिया।
जो आगे निकल जाए, उसे देखकर मत जलना,
जो पीछे रह जाए, उसे देखकर मत हँसना।
हर व्यक्ति अपनी अदृश्य लड़ाई लड़ रहा है,
हर चेहरे के पीछे एक अनकहा मौसम है,
राह में मिले तो बस दुआ- सलाम कर लिया करना।
-आलोक प्रकाश
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