सुर रंग सब साथ मिले
जीवन हंसे जब जब फूल खिले ।
प्रेम गीत का है उन्माद
उद्देश्य यही बस आज का राग ।
सुगंध सी खिलती विचार माला
हंस रही है ये नियती बाला ।
हरियाली सा ओज महकता
शान्त रसों में प्रेम दहकता ।
कहती हैं मुस्कुराकर किरणें
उद्देश्य यही बस आज का राग।
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