जब छा जाए अंधेरा और रास्ता कोई न दिखलाए,
वो दोस्त ही है, जो बिन बोले भी सब समझ जाए।
गिरे जो तू कभी ज़िंदगी के किसी इम्तिहान में,
जब टूटने लगे हौसला इस भागती पहचान में,
वो थाम के हाथ तेरा, धीरे से ये बतलाता है—
*"हंस कर देख फिर से, ये वक़्त भी गुज़र जाता है।"*
चाहे टूट जाए सपना, या जेब हो ख़ाली तेरी,
वो कमी न आने दे, कभी हँसी में तेरी।
आर्थिक मंदी हो या दिल का कोई तूफ़ान,
वो बनकर खड़ा रहे तेरी हिम्मत की चट्टान।
ना कोई शर्त रखे, ना कभी हिसाब करे,
हर नाकामी के बाद, फिर से तुझे ख़ास करे।
तू गिरे हज़ार बार, वो हर बार तुझे उठाए,
तेरी सोई हुई हिम्मत को, फिर से जगाए।
खुशनसीब हैं वो, जिन्हें ऐसा रहबर मिलता है,
जिसकी मौजूदगी में हर गम का फूल खिलता है।
शायद इसी का नाम दोस्ती का सच्चा धागा है,
जो हर मुश्किल, हर नाकामी से, हमेशा आगे भागा है।
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