वक्त का पहिया ही हिलोरे देने लगा।
ज़माना एक होकर हुंकारा देने लगा।।
समझदारी को एक कोने में रखकर।
शक्तिमानो को जैसे धमकी देने लगा।।
एक खिलौने की तरह समझने वाले।
भयभीत करने को प्रेरित करने लगा।।
जिसके सिर पर प्यार से हाथ फेरता।
उनका गुमान धड़ाम करके गिरने लगा।।
आज खो देने का मतलब समझ आया।
अडिग साम्राज्य 'उपदेश' हिलने लगा।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
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