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आईना देख कर समझ जाओगे वक्त गया

                
                                                         
                            आईना देख कर समझ जाओगे वक्त गया।
                                                                 
                            
गहरे ज़ख्मों को सहलाते उनसे रहा ना गया।।

तरह-तरह से चेहरा बना कर कुछ ना होगा।
मुस्कराना भूल जाओगे खूबसूरत वक्त गया।।

चेहरे पर रौनक ना आएगी बिना मोहब्बत के।
इश्क बखूबी जिंदा है मोहब्बत का वक्त गया।।

मोहब्बत के कर्ज़ पाल रखे जिन्होंने उम्र भर।
खुद को धोखा दे रहे अदा करने का वक्त गया।।

सुकून की बारीकियां झाँकती लगती 'उपदेश'।
यादों में सुकून झलकता मिलने का वक्त गया।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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2 महीने पहले

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