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उनका तजुर्बा

                
                                                         
                            इम्तिहान सिखा रहा क़ाबिल बना रहा।
                                                                 
                            
परेशानी में दिमाग दौड़ता रास्ता बता गया।।

दुख दर्द जिनके ताकत बन कर उभरेंगे।
आँख नम होकर उनका हौसला बढ़ा गया।।

सम्हलने के मायने कांटो के बीच आते।
जो सम्हल गए उनको मुस्कराना आ गया।।

हार मानकर जो बैठ गए आँधी तूफ़ान से।
लोग कहते उन्हें उन्हीं का सपना खा गया।।

वृक्ष से उसका तजुर्बा जानना चाहा 'उपदेश'।
उन्हें हर एक मौसम को अपनाना आ गया।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

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