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तुमसे मिलने की कोई चाह नही

                
                                                         
                            अब तुम से मिलने की कोई चाह नही।
                                                                 
                            
बेतुकी शिकायतों में रही अफवाह नही।।

बस तुम्हारी यादो से रिश्ता बाकी मेरा।
मेरी बेचैनी भी हकीकत में स्याह नही।।

मैं जानता तुमको मेरा ख्याल कितना।
मुस्कुरा लेना उससे बेहतरीन वाह नही।।

कुछ रिश्ते खत्म नही होते खामोश रहते।
खामोशी में 'उपदेश' जुदाई गुनाह नही।।

मिलेगे जरूर किसी मोड़ पर अगर हम।
कह सकते हो तो कह दो कोई राह नही।।

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
54 मिनट पहले

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