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तुम्हारी आदत लग गई

                
                                                         
                            तुम्हारी आदत लग गई क्या ये प्यार है।
                                                                 
                            
मेरे समझने में लगता रिश्ते में सुधार है।।

अब दिन की शुरुआत तेरी याद से होती।
सोने से पहले खुमारी में झलकता यार है।।

तुम्हारी आवाज गूँजती हालाकि तूँ नही।
तुम्हारी खूबसूरती से छितराया संसार है।।

हरेक बात कहने का मन करता 'उपदेश'।
हालाकि कह नही पाता रहता विचार है।।

कोई शख्स जब भी निगाह में बस जाता।
हर वक्त आँखों को बना रहता इंतजार है।।

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
37 minutes ago

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