सुकून बाहर में ढूँढ़ते थक जाओगे।
फिर मौन होकर कठोर हो जाओगे।।
खामोशी शोर मचाने लगेगी अन्दर।
तुम शायद इतने खामोश हो जाओगे।।
तब दुनिया कहेगी बदल गए हों तुम।
बेशक अपनी धुन में लीन हो जाओगे।।
मुस्कुराना हो जाएगा दूर की कोड़ी।
करीबी रिश्तों से बहुत दूर हो जाओगे।।
पसन्दीदा आवाज सुनने को मिलेगी।
ख्वाबों में 'उपदेश' करीब हो जाओगे।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
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