आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

फिर भी इस दिल की मल्लिका तुम ही हो।

                
                                                         
                            सीख लिया कभी बात में तकरार करना।
                                                                 
                            
दिल दुखने के हुनर को बरकरार रखना।।

तरह-तरह की लीलाएं अदा से कम नही।
मौका ढूँढ कर 'उपदेश' उठाये घर रखना।।

फिर भी इस दिल की मल्लिका तुम ही हो।
जानती हो कब कब इज़्ज़त अन्दर रखना।।

औरों की तरह हक जलाने का नही तुम में।
जब भी करीब बैठी तो गोद में सिर रखना।।

इश्क कब प्यार में बदल गया पता ही नही।
उसी का फायदा उठाकर शराब दूर रखना।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर