आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

शर्म से लाल

                
                                                         
                            मोहब्बत करने वाले शर्म से लाल होते।
                                                                 
                            
उनके ज़मीर में सच रहते झूठ से बचते।।

सच्चे लोग अक्सर इल्ज़ाम से भयभीत।
कैसे कहे झूठे लोग पीछा नही छोड़ते।।

इज़्ज़त बचाने के लिए चोरी बढ़ जाती।
खुल कर मिलने पर ताने हजार आते।।

बेगुनाह कौन है 'उपदेश' इस ज़माने में।
बदनामी के डर से इंसानियत नही दिखाते।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर