पतंग से हवा की शरारत झाँकर में उलझा गई।
शरारत छोटी हो या बड़ी गुरूर में उलझा गई।।
बचाने को हाथ सामने आए उंगलियाँ वाले।
भरोसे की कमी से मझधार में उलझा गई।।
वैसे तो लफ्ज ही काफी थे तख्त हिलाने को।
आँखों में आई चमक तो प्यार में उलझा गई।।
कॉकरोच मिटाओगे तो कई कॉकरोच उभरेंगे।
उनकी कमान 'उपदेश' सरकार में उलझा गई।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
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