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शादी के पहले की बात नही

                
                                                         
                            कोई तो मजबूरी होगी लोक लाज की।
                                                                 
                            
मूलधन छोड़कर इकट्ठे होते व्याज की।।

ख्वाबों में उलझा एहसास ठहराव पर।
शादी के पहले की बात नही आज की।।

सपने रोज नये नये आयाम लेकर आते।
गहरी नींद को भी छूट नही रिवाज की।।

बनकर दरिया बह निकलता बे-जरूरत।
उसको जरूरत पड़ती नही रियाज की।।

मोहब्बत को अगर बीमारी माने 'उपदेश'।
प्रेमी के पास दवाई है उसके इलाज की।।

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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3 घंटे पहले

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