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तब सारी चिन्ताओं से मुक्त होती 'उपदेश'।

                
                                                         
                            बेहतर प्यार के लिए संवाद की जरूरत।
                                                                 
                            
होगा महान प्रेम संभालती मौन की मूरत।।

हज़ारों प्रेम कहानियाँ लिख चुका उसपर।
उसका प्रेम एक अलग स्तर का ब्रह्ममुहूरत।।

मौन में जबरन वो प्रेम को कबूल करवाती।
महसूस करके बहलाती भावना के बदौलत।।

ऐसा मौन बातचीत का बन्द हो जाना नही।
एहसास से ओतप्रोत होकर बदलती सूरत।।

तब सारी चिन्ताओं से मुक्त होती 'उपदेश'।
खोल कर फैला देती अपनी सारी दौलत।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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एक महीने पहले

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