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सफलता

                
                                                         
                            शिकायतें जब तब रहेंगी
                                                                 
                            
सांस चलती जिन्दगी में।
मन भटकता कुछ खोजता,
विचारों की गन्दगी में।
सफलता किसको कहें 'उपदेश',
आदतों से मजबूर चालाकी,
सुधरता कह रहा मन मंदिर,
सुधार आता नही बन्दगी में।

उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद
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4 वर्ष पहले

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