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अखबारो की सुर्खियों में नापाक इरादे पढ़ता

                
                                                         
                            रिश्ता मतलब का एक मोड़ तक ही चलता।
                                                                 
                            
ज़रूरत पड़ी तो छोटी सी बात पर बदलता।।

यकीन कैसे करे ज्यादातर शख्स झूठ बोलते।
अक्सर करीब बनकर ही विश्वासघात करता।।

जितना मिला नाकाफी हवस उतनी बढ़ गई।
भरोसा दिलाया गया उसी की लूटपात करता।।

अखबारो की सुर्खियों में नापाक इरादे पढ़ता।
दिल सहमता इसलिए हर एक पर शक करता।।

पलट कर आ गए कुछ एक रिश्ते फिर 'उपदेश'।
मोहब्बत करने वाला पलटने में थोड़ी देर करता।।

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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3 घंटे पहले

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