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मन में उछल कूद करती अदृष्य खड़ी रहती।।

                
                                                         
                            रिश्ते बंधे होते है प्यार की झलक रहती।
                                                                 
                            
हर बात में तसुव्वुर होता आस बँधी रहती।।

प्यार याद आने पर सुकून भी बेचैनी भी।
थकने पर नींद में ख्वाबो की झड़ी रहती।।

कितना कुछ कहने को है मगर रुक जाता।
बिना कहे प्यार आता तबियत बड़ी रहती।।

तुम कभी पास रहो अब शायद जरूरी नही।
महसूस करके तुम्हें इंतजार की घड़ी रहती।।

कुछ तो है जो तुम्हें औरो से अलग करता।
इतनी उम्र के बाद भी जिक्र में अड़ी रहती।।

वक्त ने जो नवाज़ा उसका शुक्रिया 'उपदेश'।
मन में उछल कूद करती अदृष्य खड़ी रहती।।

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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27 मिनट पहले

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