आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

नसीब बौना हो गया

                
                                                         
                            नसीब बौना हो गया 'उपदेश' जाने के बाद।
                                                                 
                            
सुकून भी आया मगर खुद के सोने के बाद।।

मलाल था नही मगर आँखें लाल दिखने लगी।
देर से जागे सोते रहे इन्फेक्शन होने के बाद।।

भरोसा दिलाया मगर हकीकत उल्टी निकली।
नज़रे मिलाना छूटा उनसे रोग होने के बाद।।

अगर दवाई चाहिए तो मिलेंगी उन्हीं के पास।
उनका होना पड़ेगा तुम्हें मिन्नतें करने के बाद।।

खुद की नादानी भारी खुद पर इल्ज़ाम लेकर।
मोहब्बत में सजा काट रहा तन्हा होने के बाद।।

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
44 मिनट पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर