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खुशनसीबी से ख्वाबों में दीदार अपनी जगह।।

                
                                                         
                            प्रतियोगिता में स्थान पाना अपनी जगह।
                                                                 
                            
बदनामी से शोहरत बढ़ाना अपनी जगह।।

ख्वाब दिल का नजर में साकार हो जाना।
जिम्मेदारी में पड़ कर दबाना अपनी जगह।।

बिजली सी दौड़ी थी कभी उनको देखकर।
शरीर का सहयोग ना दे पाना अपनी जगह।।

हकीकत में मोहब्बत मरती नही आसानी से।
वक्त के संग निभाना 'उपदेश' अपनी जगह।।

अब भी उनकी यादो में खोए रहना हकीकत।
खुशनसीबी से ख्वाबों में दीदार अपनी जगह।।

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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4 घंटे पहले

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