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मोहब्बत इसी का नाम

                
                                                         
                            तुम्हारा ख्याल आते ही वक्त संवरने लगता।
                                                                 
                            
तन्हाई शांत सी लगती चेहरा निखरने लगता।।

बाते पूरी होकर भी अधूरी सी लगती मुझको।
खामोशी का आलम रहता प्रेम तड़पने लगता।।

ना तुम कह पाए किसी से ना मेरे लब खुलते।
बीता हुआ तजुर्बा अपनी कहानी कहने लगता।।

तेरे सामने होने से गुजरी हकीकत फन लगती।
मुस्तैद जिन्दगी में फिर से गर्म खून बहने लगता।।

इश्क ऐसा हो कि आवाज़ की जरूरत ना रहे।
वज़ह खोजकर 'उपदेश' वही नाम चलने लगता।।

शायद इसी को मोहब्बत का नाम देते हैं लोग।
तेरे ना होने पर भी वही एहसास उभरने लगता।।

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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3 घंटे पहले

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